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हाथरस सिकन्दराराऊ निबंधन कार्यालयों के निजीकरण के विरोध में आंदोलन छठे दिन भी जारी, 18 जून तक कलमबंद हड़ताल का ऐलान

Screenshot 20260616 152919 Galleryहाथरस सिकन्दराराऊ 15 जून। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालयों के कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के प्रस्ताव के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का आंदोलन सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा।

 

उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में विशाल धरना-प्रदर्शन एवं कलमबंद हड़ताल आयोजित कर प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित निजीकरण नीति के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। धरना स्थल पर आयोजित आपात बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता डी. के. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने की, जबकि संचालन जयप्रकाश गुप्ता एडवोकेट ने किया। बैठक में निबंधन कार्यालयों के निजीकरण के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक सरकार निजीकरण संबंधी प्रस्ताव वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन और कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। साथ ही 18 जून 2026 तक आंदोलन जारी रखने तथा आगे की रणनीति तय करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निबंधन कार्यालयों का निजीकरण हजारों अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं और जटिल हो सकती हैं। वक्ताओं ने सरकार से जनहित, पारदर्शिता और रोजगार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नीति को तत्काल निरस्त करने की मांग की। धरने में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर नरेश प्रताप, रनवीर

 

सिंह पुंडीर, मुरारी लाल, गोरीशंकर गुप्ता, वीरपाल सिंह, राजेश बघेल, रामकुमार यादव, महेश अंजना, प्रमोद बघेल, अशोक कुमार शर्मा, जितेन्द्र यादव (सचिव), हिमांशु शर्मा, रुपेन्द्र बघेल, जितेन्द्र सिंह, राजेश यादव, देवेंद्र बघेल, भगवान सिंह, अरशद अली, राहुल वर्मा, प्रियांशु दरगढ़, समीर यादव, विजय उपाध्याय, दीपेश पाठक, आनन्द कुमार सिंह, गिरीश यादव, अवधेश यादव, सजीव यादव (कातिब), धनीराम (कातिब), केदार सिंह, राजकुमार (कातिब), अमर सिंह, बेनीराम, विश्वविजयी, देवेन्द्र सिंह, यशपाल, अमित कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब, स्टाम्प विक्रेता एवं टाइपिस्ट उपस्थित रहे।

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